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हमारी सफलता हमारी आत्मछवि से ज्यादा नहीं हो सकती |

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आत्मछवि

हमारी आत्मछवि का बहुत बड़ा सम्बन्ध है  हमारी सफलता से, हमारे रिश्तों से, हमारे स्वास्थ्य से !

कैसी है हमारी छवि हमारी नज़रों में

दुनिया हमें कैसे देखती है इससे कहीं महत्वपूर्ण है हम खुद को कैसे देखते है ! सेल्फ इमेज या आत्मछवि वो अदृश्य शक्ति है जो हमें आगे बढ़ते रहने को प्रेरित करती है या हमें पीछे कि तरफ खींचती है | जो हमें मौको को इस्तेमाल करने कि प्रेरणा देती है या उन्हें हाथ से निकल जाने देती है | जो हमें प्रतिष्ठा दिलाती है या जो हमें प्रतिष्ठा लायक नहीं बनने देती |  

हमारी सफलता हमारी आत्मछवि से बेहतर नहीं हो सकती

अगर ऐसा कहें तो अनुचित नहीं होगा कि हमारी सफलता हमारी आत्मछवि से बेहतर नहीं हो सकती।  तो जब हमें वो मनचाही सफलता नहीं मिल रही होती जिसके लिए हम प्रयास कर रहे होतें हैं | हम वो ऊचाइयां नहीं छु रहे होते जिन्हे हम छूना  चाहते हैं | हमें अपने रिश्तों में वो गहराई नहीं मिल रही होती  जिसे हम पाना चाहते है – तब हमें उसका कारण बाहर नहीं ढूँढना चाहिए, क्यूंकि वो बाहर है ही नहीं | तब हमें अपने अंदर जाना चाहिए क्यूंकि कारण अंदर है।  कारण,  हमारी अपनी नज़रों में हमारी छवि कैसी है , वहाँ है।  हम खुद को कैसे देखते है, खुद के बारे में क्या सोचते हैं, खुद को किस लायक समझते हैं, और खुद को किस तरह स्वीकार करतें हैं – कारण वहाँ हैं।   

आत्मछवि (self image ) उन सब छवियों से ऊंची और ताकतवर होती है जो हम बाहर बनाते है, या जो बाहर बन जाती है । स्वस्थ आत्मछवि हमें विश्वास देती है, हमें निडर बनाती है, हमें विश्वासपात्र बनती है, हमें परेशानियों से बेहतर तरीके से deal  करने में सक्षम बनाती है, हमें अपनी गलतियों को मानने कि और उनसे प्रेरणा लेने का साहस देती है, हमें दूसरों को सही नज़रिये से देखने और समझने देती है |  जबकि नकारात्मक आत्मछवि हमें असुरक्षा कि भावना देती है, हमें हमेशा दूसरों पर शक करने को प्रेरित करती है, हमें परेशानिया आने पर निराशा कि तरफ धकेलती हैं , हमें अपने सम्बन्धो में विश्वास कायम नहीं करने देती, और सफलता के मौकों के आने पर खुद पर विश्वास न करने कि वजह बनती है।   

आज के समय में , जहाँ हम दूसरों से आगे निकल जाना चाहते हैं, जहाँ  हमारे सामने हर पल एक  प्रतिस्पर्धा है | जहाँ खुद के लिए वक्त निकाल  पाना एक चुनौती है | जहाँ समाज में अपनी शख्सियत को बनाये रखने का दबाब हमेशा बना रहता है| जहाँ सम्बन्धों  का महत्व कम होता जा रहा है| जहाँ आर्थिक और सामजिक ऊंचे स्तर पर खुद को बनाये रखना एक निरंतर चुनौती है | जहाँ हम बाहर से अंदर कि तरफ जीते हैं – वहाँ हमें ये समझने का मौका ही नहीं मिलता कि हमारे अंदर क्या  चल रहा है और मौका मिलता भी है तो हम उस मौके से भागना  चाहते है , खुद का सामना नहीं करना चाहते । और यहीं  से शुरुआत होती है खुद से और नफरत करने कि, दुनिया से डर  की, अपराध की, लत कि (addiction ),  depression  की , रूखेपन की  , बीमारियों की, असफलता की, अकेलेपन की।   

आत्मछवि को बेहतर करने के लिए अंदर से बाहर कि तरफ जीएं

  • नकारात्मक आत्मछवि के चक्रव्यूह  से निकलने के लिए सबसे पहला कदम है खुद को जानना | खुद कि अच्छाइयों और बुराइयों को जानना | खुद कि कमियों और सीमितताओं को जानना । जानने  का सम्बन्ध सिर्फ अपने बारे में पता करना नहीं है इसका सम्बन्ध है महत्व पूर्ण कदम, खुद को स्वीकार करने से । 
  • इस चक्रव्यूह से निकलने का दूसरा कदम है खुद को पूर्ण रूप से स्वीकार करना ! जब तक हम खुद को अपनी खूबियों और कमियों के साथ स्वीकार नहीं करते तब तक हम खुद के साथ अच्छा सम्बन्ध नहीं बना पाएंगे! और खुद को स्वीकार करने से पहले खुद को जानना जरूरी है।  खुद को स्वीकार करना एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कदम है खुद के साथ एक स्वस्थ सम्बन्ध बनाने कि दिशा में । और जब तक हमारे खुद के साथ हमारा सम्बन्ध ठीक नही है किसी और से हमारे सम्बन्ध कैसे ठीक हो सकते हैं।  तो दूसरा कदम है खुद को उन सब कमियों और अच्छाइयों के साथ बिना किसी  शर्त के स्वीकार करना। यह पहली सीडी है आगे बढ़ने कि । 
  • तीसरा कदम है खुद को सही दिशा देने के लिए पहल करना । यानि खुद को लीड करना ! खुद को आगे बढ़ाना । खुद को सशक्त करना । सीखना । अपनी कमियों को दूर करने कि पहल करना । आने वाले सफलता के पलों को एन्जॉय करना । खुद पर विश्वास को बढ़ाना । सम्बन्धो को बेहतर करने के लिए पहल करना | सफलता के नए आयामों को छूने  की कौशिश करना ! दूसरों से नहीं खुद से प्रतिस्पर्धा करना । 
  • और इस क्रम का अगला और आखिरी कदम है खुद को सार्वभौमिक नियमों (universal laws ) के साथ एकमय (align ) करना । इस कदम को उठाये बिना हम सफलता के नज़दीक पहुँच कर भी सफलता को महसूस नहीं कर पाएंगे । ये वो नियम है जो हमारे  जाने और न जाने बिना भी पूरे तरीके से 24 घंटे सातों दिन काम करते रहतें है । ये वो नियम है जिन्हे हमें स्वीकार करना ही होता है क्यूंकि ये हर  समय , देश, भाषा , gender , पोजीशन, फेम के लिए समान है । ये वो एहसास है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है और बहुत बार सब कुछ हाथ में होने के बावज़ूद हमें ये मानना पड़ता है कि कुछ तो है जो हमारे हाथ में नहीं है । असली सफलता का एहसास हमें ‘उस कुछ ‘ से एकमय (align ) करने के बाद ही हो सकता है । 

इन सब कदमों में आत्मछवि एक महत्वपूर्ण और निर्णयात्मक भूमिका अदा क रती है ।  और एक बात तय है अगर हम अपनी आत्मछवि के बारे में aware हो जाएँ तो हम उस missing  link  को पहचान सकते हैं जो हमारी सफलता और असफलता, हमारी ख़ुशी और मायूसी, हमारे जोश और निराशा के बीच है ।   

याद रखिये आप कभी भी अपनी  आत्मछवि से ज़यादा सफल नहीं हो सकते । अपने ऊपर काम कीजिये । बाहर कि चिंता छोड़िये |  अंदर से खुद को सशक्त कीजिये । लोगों का अप्रूवल छोड़िये खुद का अप्रूवल लीजिये । बाहर के सम्बन्धो से पहले खुद के साथ सम्बन्ध को बेहतर बनाइये । दूसरों के बारे में जानने  से पहले खुद के बारे में जानिये ।   

जिंदगी बहुत खूबसूरत है उसे जी भरके जियें ।